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  • बिलासपुर नगर निगम के सब इंजीनियर ने की आत्महत्या, सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला शव; हाल ही में हुआ था तबादला, मौत से पहले छोड़ा ऐसा नोट जिसने बढ़ा दी जांच, कलाई काटने की भी आशंका….

    बिलासपुर नगर निगम के सब इंजीनियर ने की आत्महत्या, सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला शव; हाल ही में हुआ था तबादला, मौत से पहले छोड़ा ऐसा नोट जिसने बढ़ा दी जांच, कलाई काटने की भी आशंका….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नगर निगम के एक सब इंजीनियर की संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या का मामला सामने आया है। नगर निगम कॉलोनी स्थित सरकारी आवास में उनका शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने मानसिक तनाव में होने का जिक्र किया है, हालांकि आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं लिखी गई है।

    पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान अमर सिंह चौहान के रूप में हुई है, जो नगर निगम के जोन-4 में सब इंजीनियर के पद पर पदस्थ थे। बुधवार सुबह जब काफी देर तक उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों और आसपास के लोगों को संदेह हुआ। दरवाजा खोलने पर उनका शव कमरे के अंदर फंदे से लटका मिला। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

    जांच के दौरान पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। प्रारंभिक जांच में नोट में केवल मानसिक परेशानी का उल्लेख मिला है, लेकिन आत्महत्या के कारण का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस ने नोट को जब्त कर उसकी लिखावट और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि फांसी लगाने से पहले अमर सिंह चौहान ने अपनी कलाई काटने की कोशिश की थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

    जानकारी के मुताबिक, अमर सिंह चौहान का हाल ही में जगदलपुर तबादला हुआ था। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि स्थानांतरण, पारिवारिक परिस्थितियां या अन्य व्यक्तिगत कारण उनकी मानसिक परेशानी की वजह तो नहीं बने। फिलहाल किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच और परिजनों व परिचितों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार: 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य होगा ‘प्री-पेड मीटर’ सिस्टम…

    छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार: 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य होगा ‘प्री-पेड मीटर’ सिस्टम…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय  सरकार ने शासकीय खर्चों में मितव्ययिता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, प्रदेश के सभी  सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और विभागों में अब बिजली खपत और बिल भुगतान की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। आगामी 1 अगस्त से सभी सरकारी विभागों में ‘प्री-पेड बिजली बिलिंग व्यवस्था’ को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी विभागों में होने वाले बिजली के अनावश्यक खर्च को रोकना, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सालों से लंबित बिजली बिलों के भुगतान की लेत-लतीफी को हमेशा के लिए समाप्त करना है।

    मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करेगी नई व्यवस्था

    सरकार द्वारा लागू की जा रही यह प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था ठीक वैसे ही काम करेगी जैसे मोबाइल का प्री-पेड रिचार्ज काम करता है।

    • पहले भुगतान, फिर इस्तेमाल: इस व्यवस्था के तहत सभी विभागों को अपने अनुमानित बजट और आवश्यकता के अनुसार बिजली उपयोग करने से पहले एक निश्चित राशि एडवांस में जमा करानी होगी (रिचार्ज करना होगा)। राशि जमा होने के बाद ही संबंधित कार्यालय की बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चालू रहेगी।
    • अलर्ट और री-रिचार्ज: यदि किसी विभाग का रिचार्ज बैलेंस खत्म होने की स्थिति में पहुंचेगा, तो सिस्टम द्वारा समय रहते इसकी सूचना (अलर्ट) दी जाएगी। विभाग को ब्लैकआउट से बचने के लिए समय सीमा के भीतर दोबारा राशि जमा करनी होगी।
        • सटीक मॉनिटरिंग: इस डिजिटल व्यवस्था से हर विभाग अपनी दैनिक और मासिक बिजली खपत पर सीधे और लगातार नजर रख सकेगा, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार बिजली खर्च का सटीक बजट और योजना बना सकेंगे।

      करोड़ों रुपये के बकाया बिलों से मिलेगी मुक्ति

    • अक्सर देखा जाता है कि बजट की कमी, प्रशासनिक लेत-लतीफी या लापरवाही के कारण सरकारी विभागों में बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं हो पाता। इसके चलते बिजली कंपनियों (Discoms) का करोड़ों रुपये का राजस्व विभागों पर बकाया हो जाता है, जिससे पूरी  विद्युत वितरण प्रणाली प्रभावित होती है।नई प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद ‘बकाया बिल’ जैसी समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इससे जहां एक तरफ बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में बिजली के उपयोग को लेकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।
        • इंस्टॉलेशन प्रक्रिया: सभी सरकारी भवनों, कार्यालयों और संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्री-पेड मीटर और संबंधित बिलिंग सॉफ्टवेयर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
        • समय सीमा: उच्चाधिकारियों ने तकनीकी अमले और डिस्कॉम को सख्त हिदायत दी है कि 1 अगस्त की तय समय सीमा से पहले सभी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।चरणबद्ध तरीके से लागू होगा सिस्टम, तैयारियां तेजराज्य सरकार ने ऊर्जा विभाग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

      विशेषज्ञों की राय: भविष्य में आम जनता के लिए भी खुलेंगे रास्तेऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि प्री-पेड बिजली व्यवस्था उपभोक्ताओं को अपने खर्च पर बेहतर नियंत्रण रखने की आजादी देती है। देश के कई अन्य राज्यों में इस तरह के प्रयोग पहले ही सफल हो चुके हैं।छत्तीसगढ़ में सरकार ने इसकी शुरुआत स्वयं के विभागों से की है, जो कि एक सकारात्मक संदेश है। जानकारों का कहना है कि सरकारी विभागों में इस व्यवस्था के परिणामों और सफलता की समीक्षा करने के बाद, आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से वाणिज्यिक (Commercial) और घरेलू (Domestic) उपभोक्ताओं के लिए भी विस्तारित करने पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल, 1 अगस्त से लागू होने वाले इस क्रांतिकारी नियम को लेकर मंत्रालय से लेकर जिला स्तर के दफ्तरों में हलचल तेज है और सरकार को उम्मीद है कि यह कदम राज्य के बिजली प्रबंधन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा।

  • गरीब रथ एक्सप्रेस के AC कोच में महिला को सांप ने डसा! रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

    गरीब रथ एक्सप्रेस के AC कोच में महिला को सांप ने डसा! रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

    देश में सुरक्षित और आरामदायक रेल यात्रा के दावों के बीच गरीब रथ एक्सप्रेस के एसी कोच में एक महिला को कथित सर्पदंश की आशंका का मामला सामने आने के बाद रेलवे की  सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद यात्रियों में दहशत का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि एसी कोच तक विषैले जीव पहुंच सकते हैं, तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

    ट्रेन खुलने के कुछ ही मिनट बाद बिगड़ी तबीयत

    जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर शहर थाना क्षेत्र के बैरिया निवासी रिमझिम सिंह 3 जुलाई की रात डालटनगंज से नई दिल्ली जाने के लिए गरीब रथ एक्सप्रेस की जी-12 बोगी में सवार हुई थीं। ट्रेन खुलने के करीब 15 मिनट बाद उन्हें अचानक तेज पसीना आने लगा, घबराहट महसूस हुई और पैर में असहनीय दर्द शुरू हो गया।

    लंबीदूरी के लिए बस और रेल की सेवाएं

    ट्रेन में मौजूद चिकित्सक ने प्राथमिक जांच के दौरान सर्पदंश की आशंका जताई। इसके बाद गढ़वा रोड जंक्शन पर महिला और उनके बच्चों को ट्रेन से उतार दिया गया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

    रेलवे की मेंटेनेंस और पेस्ट कंट्रोल पर सवाल

    घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे की कोच मेंटेनेंस, साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि रेलवे नियमित निरीक्षण, सफाई और फ्यूमिगेशन का दावा करता है, तो एसी कोच में विषैले जीव पहुंचने की आशंका चिंताजनक है।

    यात्रियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, संबंधित कोच की तकनीकी एवं सुरक्षा जांच, साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था की समीक्षा तथा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला: युवक को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने की दी धमकी, फिर दो युवतियों ने ऐंठे रुपए, जांच में जुटी पुलिस….

    हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला: युवक को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने की दी धमकी, फिर दो युवतियों ने ऐंठे रुपए, जांच में जुटी पुलिस….

    रायपुर। राजधानी रायपुर में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। पुलिस ने युवक की शिकायत पर दो युवतियों के खिलाफ ब्लैकमेल कर 25 हजार रुपये की उगाही करने और लगातार झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप में  अपराध दर्ज किया है।

    पढ़िए पूरी खबर

    सिविल लाइन थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, शंकर नगर निवासी जयंत चौधरी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी मुलाकात मई 2026 में गुढ़ियारी में नित्या सिंह और पायल उर्फ आंचल तिवारी से हुई थी। दोनों ने पहले नौकरी दिलाने और पार्लर खोलने के नाम पर आर्थिक मदद मांगी। इसके बाद लगातार फोन-मैसेज के जरिए संपर्क बनाए रखा और मिलने का दबाव बनाती रहीं।

    इस तरह बनाया शिकार

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 14 जून को मुलाकात के दौरान दोनों युवतियों ने सिगरेट ऑफर की, जिसके बाद युवक और उसके साथी को चक्कर आने लगे। इसी दौरान कथित रूप से उनकी फोटो और वीडियो बना लिए गए। अगले दिन दोनों युवतियों ने फोन कर आरोप लगाया कि उनके साथ गलत हरकत हुई है और मामला दबाने के लिए पैसे की मांग की। साथ ही पैसा नहीं देने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने और परिवार के साथ कार्यालय में बदनाम करने की धमकी भी दी।

    25 हजार देने के बाद और पैसे की मांग

    पीड़ित का आरोप है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह डर गया और 25 जून को तरुण नगर हाट बाजार के पास अपने मित्र के साथ पहुंचकर दोनों युवतियों को 25 हजार रुपये नगद दे दिए। इसके बावजूद आरोपित लगातार और रुपये मांगती रहीं। एक जुलाई को दोनों युवतियों ने उसकी कार में रखे नगदी से भरे बैग पर हाथ साफ करने की कोशिश की। वहीं 10 जुलाई को वे उसके कार्यालय पहुंचीं और स्टाफ के सामने गाली-गलौज करते हुए कहा कि यदि पैसे नहीं दिए तो झूठे दुष्कर्म के केस में फंसा देंगी।

    मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

    फिलहाल पुलिस ने शिकायत के बाद मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, चैट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

  • चिरमिरी नगर निगम में 9 एल्डरमैन की एंट्री, स्वास्थ्य मंत्री बोले : अब विकास कार्यों में आएगी और तेजी….

    चिरमिरी नगर निगम में 9 एल्डरमैन की एंट्री, स्वास्थ्य मंत्री बोले : अब विकास कार्यों में आएगी और तेजी….

    चिरमिरी नगर निगम में शनिवार को 9 मनोनीत पार्षद (एल्डरमैन) ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि नगर निगम में 9 एल्डरमैन के जुड़ने से विकास कार्यों में नई गति आएगी और पूरे 40 वार्डों के विकास को मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि एल्डरमैन का दायित्व पूरे नगर निगम क्षेत्र के विकास में सहयोग देना है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समन्वय से जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा।

    कार्यक्रम में एमसीबी कलेक्टर संतन जांगड़े, महापौर राम नरेश राय, सभापति संतोष सिंह, निगम आयुक्त बिजेंद्र सारथी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

  • पूर्व मंत्री मो. अकबर का बड़ा आरोप, कहा- नकटी सहित 6 गांवों की 1076 एकड़ जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी….

    पूर्व मंत्री मो. अकबर का बड़ा आरोप, कहा- नकटी सहित 6 गांवों की 1076 एकड़ जमीन बिल्डरों को देने की तैयारी….

    रायपुर। नकटी विवाद को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की भाजपा  सरकार अब नकटी गांव के विवाद को सुलझाने के बजाय वहां की जमीनों को लेकर एक अन्य विवाद की तैयारी में है। शासकीय दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि नकटी सहित सेरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रमचंडी, बरौंदा और रीको की कुल 436.01 हेक्टेयर (करीब 1076 एकड़) भूमि को नगर विकास योजना के नाम पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

    शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका

    मोहम्मद अबकर का कहना है कि इस प्रस्तावित योजना में नकटी गांव की भी कुछ जमीनों को शामिल किया गया है। सरकार स्पष्ट करें कि इस योजना में वह विवादित जमीन तो शामिल नहीं है जहां विध्वंश हुआ है। उन्होंने कहा, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी निविदा के दस्तावेज बताते हैं कि चयनित एजेंसी को सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत जैसी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने के बदले मिश्रित उपयोग (मिक्स यूज) भूमि के विकास और उसके विक्रय का अधिकार दिया जाएगा। इसका मतलब ये है कि उक्त जमीनों को सीधे न बेचकर डेवलपर के माध्यम से बेचा जा रहा है।

    पूर्व मंत्री अकबर ने कहा, निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 है। नकटी गांव की जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है, प्रभावित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधार अभी तक नहीं हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में ग्राम नकटी में विध्वंश के बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति है इसलिए जब तक पीड़ित परिवारों को न्यायपूर्ण और सर्वसम्मत हक नहीं मिल जाता, तब तक सरकार की प्राथमिकता मान्य व्यवस्थापन ही होना चाहिए।

  • रथ द्वितीया पर्व में मनाया जाएगा गायत्री शक्तिपीठ का 27 वां प्राण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव..

    रथ द्वितीया पर्व में मनाया जाएगा गायत्री शक्तिपीठ का 27 वां प्राण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव..

    रथ द्वितीया पर्व में मनाया जाएगा गायत्री शक्तिपीठ का 27 वां प्राण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव.
    अशोक महाराज होंगे मुख्य अतिथि..

    खरसिया। गायत्री शक्तिपीठ खरसिया का 27 वा॑ वार्षिक उत्सव रथ द्वितीया दिनांक 16 जुलाई वार गुरुवार शाम 7 बजे वैदिक मंत्रों चार संगीतमय महाद्विप यज्ञ शान्ति कुंज हरिद्वार प्रतिनिधि श्री बृजमोहन जी के द्वारा संगीतमय महाद्विप यज्ञ सम्पन्न कराया जावेगा जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुंगलीपाली बरमकेला के भागवत प्रवक्ता विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित श्री अशोक कुमार जी उपस्थित रहेंगे तथा विशिष्ट अतिथि खरसिया नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग होंगे।
    गायत्री परिवार ट्रस्ट प्रबंधक ट्रस्टी सुरेश कबुलपुरिया ने बताया कि यह गायत्री शक्तिपीठ माताओ मां गायत्री मां लक्ष्मी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा शान्ति कुंज हरिद्वार वरिष्ठ आदरणीय डाक्टर श्री प्रणब पण्डाजी के कर कमलों में आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया रथ सवत 2056 को सम्पन्न हुआ है यह शक्तिपीठ खरसिया ह्रदय स्थल पर स्थित है भव्य सुंदर बड़ी प्रतिमा मां गायत्री मां लक्ष्मी मां दुर्गा के साथ परम पूज्य गुरुदेव श्री राम शर्मा जी माता भगवती देवी शर्मा की प्रतिमा विराजमान हैं। 16जुलाई शाम 7 बजे वैदिक मन्त्रों चार संगीतमय महाद्विप यज्ञ एवं आरती शान्ति पाठ के पश्चात बाद अमृत रूपी प्रसाद का विरतण किया जावेगा।
    गायत्री परिवार खरसिया ने सभी माताओं बहनों भाईयों से अपील की है कि उपरोक्त कार्यक्रम में परिवार सहित पहुंच कर माताओं का दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनावें। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विकास अग्रवाल, संदीप कबुलपुरिया, राकेश गर्ग, अंकित बंसल, राजेश अग्रवाल, अमित बंसल के साथ उप प्रबंधक ट्रस्टी जयप्रकाश, पवन अग्रवाल, श्रीमती कोशल्या देवी, श्रीमती विमला देवी, डाक्टर आर सी अग्रवाल, वासुदेव, सुरेश अग्रवाल कुडमकेला, प्रहलाद गर्ग, सुनील सुल्तानिया, घनश्याम अग्रवाल, सुनिल शर्मा सहित नगर के गणमान्य नागरिक तन मन से लगे हुए हैं।

  • अरूण चौधरी बने नगरीय निकाय प्रकोष्ट के जिला सह संयोजक.. प्रेस क्लब सहित नगर के पत्रकारों ने दी बधाई..

    अरूण चौधरी बने नगरीय निकाय प्रकोष्ट के जिला सह संयोजक.. प्रेस क्लब सहित नगर के पत्रकारों ने दी बधाई..

     

    खरसिया। वार्ड नं. 11 के सक्रिय एवं संघर्षशील पार्षद अरूण चौधरी को छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव की सहमति से एवं जिलाध्यक्ष अरूण धर दीवान एवं नगर पालिका अध्यक्ष कमल गर्ग की अनुशंसा पर भारतीय जनता पार्टी नगरीय निकाय प्रकोष्ठ द्वारा रायगढ़ जिला के सह संयोजक नियुक्त किया गया है। अरूण चौधरी के सह संयोजक नियुक्त होने पर वरिष्ठ भाजपा नेता गिरधर गुप्ता, बजरंग अग्रवाल, अशोक मंडी, गोपाल शर्मा, मंडल अध्यक्ष विजय शर्मा, विनोद कबूलपरिया, पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेश घनसू, सतीष अग्रवाल, मंडल महामंत्रीद्वय मनीष रावलानी, आनंद अग्रवाल, मीडिया प्रभारी संतोष यादव, हनुमान अग्रवाल, हरिओम शर्मा, गिरधारी गबेल, संजय अग्रवाल, पार्षदगण दीपक अग्रवाल, ललित राठौर, राधे राठौर, विनोद सिदार, देवप्रसाद चौहान, कार्यालय मंत्री किशोर शर्मा सहित अनेक भाजपा नेताओं ने बधाई दी है।

    *प्रेस क्लब ने दी बधाई*

    विगत अनेक वर्षों से पत्रकार के रूप में अपने सामाजिक दायित्यों के निर्वाहन कर रहे नगर पालिका के पार्षद अरुण चौधरी को प्रेस क्लब खरसिया के अध्यक्ष अजय गब्बर, सुनील अग्रवाल, विकास ज्योति, मनीष अग्रवाल सहित नगर के सभी पत्रकारों ने बधाईयाँ देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

  • बिलासपुर में सेक्सटॉर्शन गैंग का नया खेल, महिला शिक्षिका से 76 हजार की ठगी…

    बिलासपुर में सेक्सटॉर्शन गैंग का नया खेल, महिला शिक्षिका से 76 हजार की ठगी…

    बिलासपुर। जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाते हुए एक महिला शिक्षिका को सेक्सटॉर्शन का शिकार बना लिया। ठगों ने महिला को अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाकर डराया और एफआईआर दर्ज कराने व समाज में बदनाम करने की धमकी दी। डर और मानसिक दबाव में आकर शिक्षिका ने ठगों के बताए अनुसार अलग-अलग किश्तों में कुल 76,500 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

    शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 28,993 रुपए की राशि होल्ड करा दी है। वहीं सिविल लाइन पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रहने वाली 42 वर्षीय शिक्षिका को 4 जुलाई को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सुनील बताया और महिला से कहा कि उसके मोबाइल से अश्लील वीडियो देखे जाने की जानकारी उसके पास है। आरोपी ने महिला को डराने के लिए दावा किया कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी और उसकी कथित गतिविधियों को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।

     

    आरोपी ने लगातार फोन पर महिला को धमकाया और कहा कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी तो उसे कानूनी कार्रवाई और बदनामी का सामना करना पड़ेगा। अचानक आए इस तरह के आरोप और धमकियों से महिला घबरा गई। आरोपी ने इसी डर का फायदा उठाते हुए महिला को एक क्यूआर कोड भेजा और फोन-पे के माध्यम से पैसे भेजने के लिए कहा। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की धमकियों में आकर शिक्षिका ने पांच अलग-अलग किश्तों में कुल 76,500 रुपए ट्रांसफर कर दिए।

    इसके बाद जब उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं तो उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन और सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस की साइबर टीम सक्रिय हुई और बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच शुरू की। कार्रवाई करते हुए साइबर सेल ने 28,993 रुपए की राशि होल्ड करा दी है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की जानकारी जुटाकर ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    क्या होता है सेक्सटॉर्शन सेक्सटॉर्शन

    साइबर अपराध का एक तरीका है, जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति को अश्लील फोटो, वीडियो या यौन गतिविधियों से जुड़े आरोपों के नाम पर डराकर पैसे वसूलते हैं। कई बार अपराधी फर्जी वीडियो, एडिटेड फोटो या झूठे स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल कर लोगों पर मानसिक दबाव बनाते हैं। साइबर अपराधी अक्सर पीड़ित को बदनामी, पुलिस कार्रवाई या सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने का डर दिखाते हैं। इसी डर के कारण कई लोग बिना जांच किए ठगों के बताए खातों में पैसे भेज देते हैं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए लगाए गए ऐसे आरोपों से घबराएं नहीं। यदि कोई व्यक्ति एफआईआर या बदनाम करने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

  • अपोलो अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की दबिश, एयर एम्बुलेंस लापरवाही मामले की जांच शुरू…

    अपोलो अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की दबिश, एयर एम्बुलेंस लापरवाही मामले की जांच शुरू…

    बिलासपुर। अपोलो अस्पताल एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर स्वर्गीय राजेंद्र शुक्ला की मौत को लेकर उठे सवाल अभी शांत भी नहीं हुए थे कि अब एयर एम्बुलेंस से जुड़े कथित लापरवाही के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामले के तूल पकड़ने और कांग्रेस द्वारा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की जांच शुरू कर दी है।

    रायपुर और बिलासपुर से पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अस्पताल पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच शुरू की। टीम मरीजों के उपचार, भर्ती प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल की व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है। अधिकारियों ने विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाते हुए संबंधित रिकॉर्ड का मिलान भी किया।

    एयर एम्बुलेंस मामले ने बढ़ाई मुश्किलें

    ताजा विवाद एक गंभीर मरीज को हैदराबाद रेफर करने के दौरान सामने आया। परिजनों का आरोप है कि एयर एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल की अव्यवस्था के कारण मरीज को उसी दिन रवाना नहीं किया जा सका, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई।

    जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) में पदस्थ राजकुमार अग्रवाल को स्वास्थ्य खराब होने पर कुछ दिन पहले अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें हैदराबाद भेजने की सलाह दी, जिसके बाद परिवार ने करीब 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की।

    अस्पताल पर गंभीर आरोप

    परिजनों का कहना है कि एयरपोर्ट तक मरीज को ले जाने के लिए अस्पताल ने अपनी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई। उन्हें निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था करने को कहा गया। इतना ही नहीं, मरीज के साथ अस्पताल की ओर से न तो कोई डॉक्टर भेजा गया और न ही प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मरीज की तबीयत बिगड़ गई और मेडिकल टीम ने उसे हैदराबाद ले जाने से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को वापस अपोलो अस्पताल लाना पड़ा।

    अगले दिन हैदराबाद से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और विशेष चिकित्सा उपकरण बिलासपुर पहुंचे। मरीज की हालत स्थिर होने के बाद शाम को दोबारा एयर एम्बुलेंस से हैदराबाद भेजा गया। इस दौरान भी निजी एम्बुलेंस का उपयोग किया गया, हालांकि इस बार विशेषज्ञ टीम ने पहले पूरी चिकित्सा व्यवस्था का निरीक्षण किया और संतुष्ट होने के बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी।

    परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में इलाज, एयर एम्बुलेंस, अतिरिक्त हैंडलिंग शुल्क और विशेषज्ञ मेडिकल टीम सहित अब तक करीब 23 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अकेले एयर एम्बुलेंस पर लगभग 13 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि अस्पताल में इलाज और अन्य व्यवस्थाओं पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।

    जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल के विभिन्न रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की गहन जांच में जुटी हुई है।