Author: Sunil Agrawal

  • छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    छत्तीसगढ़ सरकार को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगाई रोक….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है। पीठ ने एक अक्टूबर को याचिकाओं में सुनवाई पूरी कर निर्णय को सुरक्षित रखा था। कोर्ट के इस आदेश से सरकार को झटका लगा है।

    राज्य में आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90 प्रतीशत कर दिया गया था, जिसे संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य की आबादी के अनुपात को देखते हुए पिछड़ा वर्ग के लिए हमने आरक्षण की सीमा बढ़ाई थी, जिस पर न्यायालय ने रोक लगा दी, लेकिन इसके लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम न्यायालय के सामने उचित साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करेंगे।

    चार सितंबर को जारी किया था अध्यादेशnull

    राज्य शासन ने चार सितंबर 2019 को अध्यादेश जारी कर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को 27 प्रतिशत कर दिया था। इससे एसटी, एससी व ओबीसी को मिलाकर कुल आरक्षण 82 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके अलावा महिला, दिव्यांग व अन्य वर्ग के लिए प्रावधान जोड़ने पर आरक्षण 90 प्रतिशत हो रहा है। चीफ जस्टिस की पीठ ने एक अक्टूबर को सभी याचिकाओं में एक साथ सुनवाई पूरी कर निर्णय के लिए सुरक्षित रखा था। सरकार की ओर से जो डाटा पेश किया गया वह केन्द्र सरकार का है। यहां लागू नहीं होता है।

    अध्यादेश पर तत्काल प्रभाव से रोकnull

    पीठ ने मामले को शुक्रवार को निर्णय के लिए सुरक्षित रखा गया था। याचिकाकर्ताओं व शासन के अधिवक्ताओं की उपस्थिति में कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य शासन के 4 सितंबर के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के इस आदेश से सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सरकार के अन्य पिछड़ा वर्गो की आबादी प्रदेश में 45 प्रतिशत से अधिक होने, तमिलनाडू और मराठा आरक्षण के तर्क को अमान्य कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, पलास तिवारी, रोहित शर्मा, शैलेन्द्र शुक्ला, वैभव शुक्ला, शक्तिराज सिन्हा समेत अन्य पैरवी कर रहे हैं।

    आरक्षण के पीछे सरकार का तर्क

    इसके खिलाफ आदित्य तिवारी, कुणाल शुक्ला, पुनेश्वरनाथ मिश्रा, पुष्पा पांडेय, स्नेहिल दुबे, अखिल मिश्रा, गरिमा तिवारी समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन ने बिना आंकड़े के आरक्षण को बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के खिलाफ कुल आरक्षण 82 प्रतिशत किया गया है। राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 45.5 प्रतिशत से अधिक होने के कारण आरक्षण बढ़ाया गया है। इसके अलावा सरकार को आरक्षण बढ़ाने का अधिकार है।

    शासन के इस तर्क पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य शासन ने सिर्फ एक सर्वे के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाया है। याचिका में वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक राज्य सेवा परीक्षा में ओबीसी वर्ग के अनारक्षित सीट से चयन के आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसमें उनका प्रतिनिधित्व हमेशा अधिक रहा है। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उनका प्रतिनिधित्व कम है।

    संविधान में ऐसा प्रावधान

    50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संविधान की मूल भावना के अनुसार अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है। इसे समानता का अधिकार समाप्त हो रहा है, राज्यों में जनसंख्या और जाति समुदायों के अलग-अलग अनुपात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आरक्षण संबंधि महाजन कमेटी की स्थापना की थी। महाजन कमेटी की रिपोर्ट में भी आवश्यकता अनुसार आरक्षण घटाने व बढ़ाने का अधिकार है। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण व तमिलनाडु में भी राज्य शासन ने आरक्षण बढ़ाया है। इस आधार पर याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई। हालांकि महाजन कमेटी की रिपोर्ट तय समय के लिए है।

    हमारा फैसला गलत नहीं

    आरक्षण पर लगी अंतरिम रोक पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है उसमें पहले ही छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण था। अब जा के आरक्षण 69 प्रतिशत को उन्होंने स्वीकार किया है इसका अर्थ यह हुआ कि 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति को जो दिया गया था उसे उन्होंने स्वीकार किया है। 10 प्रतिशत जो आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है, उसे भी कोर्ट ने स्वीकार किया है। 13 प्रतिशत जो ओबीसी के लिए है उसके लिए हम लोगों को लड़ाई लड़नी पड़ेगी, हमारा फैसला गलत नही है हम माननीय न्यायालय के सामने सभी साक्ष्य पेश करेंगे।

    आरक्षण विरोधी रही है कांग्रेस

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा स्थगनादेश जारी करने के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है। कौशिक ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपने ओछे राजनीतिक पाखंड से बाज नहीं आई और अब कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही बेनकाब हो गया है। कौशिक ने कहा कि कांग्रेस तो शुरू से आरक्षण के खिलाफ रही है, हालांकि जाहिराना तौर पर वह आरक्षण को अपने राजनीतिक हितों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही है।

  • घर बैठे डाउनलोड कर पाएंगे डिजिटल वोटर आईडी,जानिए प्रोसेस…

    घर बैठे डाउनलोड कर पाएंगे डिजिटल वोटर आईडी,जानिए प्रोसेस…

    मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण यानी इलेक्ट्रॉनिक इलेक्टोरल फोटो पहचान पत्र (Electronic Electoral Photo Identity Card) की शुरुआत हो गई है. अब किसी भी व्यक्ति को Voter ID Card की हार्ड कॉपी रखने की जरूरत नहीं होगी. सरकार द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के तहत कोई भी वोटर अपना वोटर कार्ड की सॉफ्ट कॉपी मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकता है।

    वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card)

    कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा शुरू किए गए वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card) के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण के तहत अब भारत के नागरिक आधार कार्ड जैसे ही डिजिटल वोटर आईडी कार्ड भी डाउनलोड कर सकेंगे. कानून मंत्री द्वारा इस सुविधा की शुरुआत आज 25 जनवरी को यानी ‘राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस’ (National Voters’ Day) के मौके पर की गई. आइए जानते हैं डिजिटल वोटर आईडी को डाउनलोड करने के तरीके और उससे जुड़ी सभी जानकारी के बारे में।

    पहचान पत्र का डिजिटल संस्करण (Digital version of identity card)

    चुनाव आयोग (Election Commission) के मुताबिक ई-इलेक्टर फोटो पहचान पत्र (डिजिटल वोटर आईडी) निर्वाचक फोटो पहचान पत्र का डिजिटल संस्करण है और इसे डिजिटल लॉकर जैसे माध्यमों से सुरक्षित रखा जा सकता है. इस डिजिटल वोटर कार्ड को पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट (PDF) में सेव किया जा सकता है.

    आयोग ने कहा है कि इस सुविधा (e-EPIC) की शुरुआत इसलिए की गई है, क्योंकि Physical card को प्रिंट करने और मतदाताओं तक पहुंचने में समय लगता है. इस पहल से दस्तावेज को तेजी से और आसानी से पहुंचाने का विचार है. अभी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस डिजिटल मोड में मौजूद हैं.

    कहां से करें डाउनलोड ? (Where to download?) 

    ई-ईपीआईसी को वोटर पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन मोबाइल ऐप या एनवीएसपी वोटर पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।

    ऐसे करें डाउनलोड (How to download digital voter id) 

    Applicant को सबसे पहले voterportal.eci.gov.in पर खुद को रजिस्टर करना होगा. 

    इसके बाद voterportal.eci.gov.in पर लॉग इन करना होगा.     

    लॉग इन के बाद EPIC नंबर या फार्म रेफरेंस नंबर डालना होगा. 

    इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिसे वेबपोर्टल पर डालना होगा.

    इसके बाद वेबसाइट पर कई विकल्प नजर आएंगे. जिसमें से डाउनलोड ई-एपिक (Download e-EPIC) के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. 

    इसके बाद आपका डिजिटल वोटर आईडी पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड हो जाएगा. 

    अगर आपको किसी भी तरह की दिक्कत हो तो आप टॉल फ्री नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।

  • बंद होंगे 100, 10 और 5 रुपए के पुराने नोट! जानें क्या है सच्चाई

    बंद होंगे 100, 10 और 5 रुपए के पुराने नोट! जानें क्या है सच्चाई

    100, 10 और 5 रुपए के पुराने नोट को लेकर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही इन नोटों को चलन से बाहर कर सकती। दावा किया जा रहा है कि मार्च के बाद आरबीआई सभी पुराने नोटों को चलन से बाहर कर सकती है। पीआईबी फैक्ट चेक में यह खबर फेक साबित हुई है। #PIBFactCheck ने ट्वीट कर कहा है कि यह दावा फ़र्ज़ी है। RBI ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी स्पष्ट किया है कि 100,10 और 5 रुपये सभी पुराने नोट वैध हैं और वह चलन में बने रहेंगे। इन्हें चलन से हटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

    एक खबर में दावा किया जा रहा है कि आरबीआई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मार्च 2021 के बाद 5, 10 और 100 रुपए के पुराने नोट नहीं चलेंगे।

    बता दें कि पीआईबी भारत सरकार की नीतियों, कार्यक्रम पहल और उपलब्धियों के बारे में समाचार-पत्रों व इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को सूचना देने वाली प्रमुख एजेंसी है। पीआईबी ने सलाह दी है कि कोरोना संकट की घड़ी में ही नहीं, देश में जब भी खराब हालात बनते हैं, तब ऐसी फेक न्यूज सोशल मीडिया में प्रसारित होती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया से मिली सूचना को अच्‍छे से परखने के बाद ही भरोसा करें।

    ऐसी किसी भ्रामक खबर की यहां करें शिकायत

    सरकार से जुड़ी कोई खबर सच है या फर्जी, यह जानने के लिए PIB Fact Check की मदद ली जा सकती है। कोई भी व्यक्ति PIB Fact Check को संदेहात्मक खबर का स्क्रीनशॉट, ट्वीट, फेसबुक पोस्ट या यूआरएल वॉट्सऐप नंबर 918799711259 पर भेज सकता है या फिर pibfactcheck@gmail.com पर मेल कर सकता है।

  • आयकर विभाग की बड़ी दबिश, ईसाई धर्म प्रचारक पॉल दिनाकरन के ठिकानों से 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त….

    आयकर विभाग की बड़ी दबिश, ईसाई धर्म प्रचारक पॉल दिनाकरन के ठिकानों से 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त….

    तमिलनाडु। आयकर विभाग को तमिलनाडु के ईसाई धर्म प्रचारक पॉल दिनाकरन के ठिकानों से 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दिनाकरन की संस्थाओं पर कर चोरी का आरोप है। इसी सिलसिले में विभाग ने उनके 25 ठिकानों पर छापा मारा था जिसमें 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। चेन्नई और कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था Jesus Calls Ministries से जुड़े 25 ठिकानों पर 20 जनवरी को छापा मारा गया था।

    दिनाकरन इस क्रिश्चियन मिशनरी के प्रमुख है। इसका कामकाज कई दूसरे देशों में भी फैला है। दिनाकरन Karunya University (deemed) के चांसलर हैं। टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि दिनाकरन के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई शनिवार को खत्म हो गई। डिपार्टमेंट को कोयंबटूर में दिनाकरन के आवास से 4.7 किलो सोना भी मिला है जिसे जब्त कर लिया गया है। साथ ही 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का भी पता चला है। छापे के दौरान मिले दस्तावेजों के वेरिफिकेशन का काम चल रहा है।

    तमिलनाडु में खासा प्रभाव

    दिनाकरन के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई 20 जनवरी को सुबह 6 बजे शुरू हुई थी। इसमें इनकम टैक्स विभाग के 200 से अधिक अधिकारी शामिल थे। अडयार में दिनाकरन के मेन ऑफिस से लेकर कोयंबटूर में उनके एजुकेशनल इंस्टीट्यूट तक छापा मारा गया था। माना जा रहा है कि विभाग के अधिकारी उनसे संगठन को मिले एफडीआई की भी जांच कर रहे हैं।

  • गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को AICC ने दी नई जिम्मेदारी….

    गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को AICC ने दी नई जिम्मेदारी….

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के गृहमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता ताम्रध्वज साहू को राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
    गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए ऑब्जर्वर एवं चुनाव प्रचार का ज़िम्मा दिया गया है।

  • बेटी के अगवा होने की शिकायत लिखाने आए पिता से थानेदार ने मांगी घूस, तूल पकड़ते ही IG ने की ये बड़ी कार्रवाई….

    बेटी के अगवा होने की शिकायत लिखाने आए पिता से थानेदार ने मांगी घूस, तूल पकड़ते ही IG ने की ये बड़ी कार्रवाई….

    अंबिकापुर। नाबालिग के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराने आए पिता से थानेदार ने दस हजार की घूस मांग ली। मामले के मीडिया में आते ही रेंज IG आर पी साय ने थानेदार जीवन जांगड़े को निलंबित कर दिया है। यही नहीं गुस्साए आई जी ने यह भी कहा कि ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

    मामला जशपुर के सन्ना थाने का है। 26 अक्टूबर को 16 वर्षीय किशोरी का अपहरण किया गया था। इस मामले में तीन महीने तक एफआईआर भी दर्ज नहीं की गयी और कार्यवाही करने और किशोरी को ढूूंढ लाने की एवज में थानेदार ने किशोरी के पिता से ही दस हजार की डिमांड कर ली। इस मामले की शिकायत आई जी तक पहुंची तो शिकायत की जांच की गई। शिकायत सही पाए जाने पर आरोपी थानेदार को निलंबित कर दिया गया।

    इस मामलेे पर बात करते हुए IG आर पी साय ने कहा कि किसी भी थाने में इस तरह की शिकायत स्वीकार ही नहीं की जा कसती। तीन महीने तक एफआईआर न लिखना और किशोरी के पिता से ही रकम की मांग करना, ये बर्दाश्त ही नहीं किया जा सकता। सभी एसपी को निर्देशित किया गया है कि वे ऐसी शिकायत मिलते ही आरोपी विवेचना अधिकारी या थानेदार को निलंबित कर वैधानिक कार्रवाई करें।

  • CGPSC की मुख्य परीक्षा और सिविल जज की परीक्षा तिथि घोषित…

    CGPSC की मुख्य परीक्षा और सिविल जज की परीक्षा तिथि घोषित…

    रायपुर। प्रदेश के युवाओं के लिए अहम खबर है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने पीएससी की मुख्य परीक्षक सिविल जज की मुख्य परीक्षा की तारीख़ें घोषित कर दी हैं। यह परीक्षाएँ मार्च में आयोजित की जा रही है।
    पीएससी की मुख्य परीक्षा 15 से 18 मार्च तक आयोजित होंगी, जबकि सिविल जज की मुख्य परीक्षा 22 मार्च को होगी।
    पीएससी की मुख्य परीक्षा 243 पदों के लिए है, जबकि सिविल जज के 32 पद हैं। परीक्षा को लेकर विस्तृत ब्यौरा कुछ देर बाद लोक सेवा आयोग वेबसाइट पर जारी करेगा।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल, कई राज्यों में पंहुचा 100 रूपये लीटर के पार

    पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल, कई राज्यों में पंहुचा 100 रूपये लीटर के पार

    बीते कई दिनों की राहत के बाद अब एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से जलाने लगे हैं.  शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के दामों में भयंकर वृद्धि हुई. डीजल की कीमतें देश के कई राज्यों में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं और 5 महीने में दूसरी बार ट्रांसपोर्टर्स ने भाड़े में बढ़ोतरी की तैयारी कर ली है।

    इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ने वाला है. वहीं रसोई पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. मुंबई में पेट्रोल 92 रुपये प्रति लीटर से पार हो गईं हैं. दिल्ली में पेट्रोल 85.45 रुपये पर और डीजल 75.63 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दामों में 25 पैसे प्रति लीटर वहीं डीजल के दामों में भी 25 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है. राजस्थान के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें सबसे ऊपर हैं. श्रीगंगानगर में पेट्रोल का दाम 97.5 रुपये है।



    हर सुबह तय होती हैं पेट्रोल की कीमतें


    विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं. इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं।

    इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमतें क्रमश: 85.45 रुपये, 86.87 रुपये, 92.04 रुपये और 88.87 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई हैं. डीजल की कीमतें भी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में क्रमश: 75.63 रुपये, 79.23 रुपये, 82.40 रुपये और 80.90 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है।



    कच्चे तेल में है तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में लगातार तेजी जारी है. कच्चे तेल में तेजी रहने से दोनों वाहन ईंधनों की महंगाई आगे और बढ़ सकती है. क्योंकि भारत तेल की अपनी जरूरतों का ज्‍यादातर हिस्सा आयात करता है.  अमेरिका में नव निर्वाचित राष्ट्रपति के सत्ता संभालने पर आगे बड़े प्रोत्साहन पैकेज आने की उम्मीदों से तेल में तेजी देखी जा रही है, क्योंकि इससे तेल की मांग में बढ़ोतरी हो सकती है।

    वहीं, तेल के स्टॉक में कमी का अनुमान भी एक कारण हो सकता है.  इससे पहले तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल के दाम में दिल्ली में 25 पैसे, कोलकाता और मुंबई में 24 पैसे जबकि चेन्नई में 22 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी और डीजल के दाम दिल्ली और कोलकाता में 25 पैसे प्रति लीटर जबकि मुंबई में 26 पैसे और चेन्नई में 24 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

  • किसान आंदोलन में फूट, नेता वीएम सिंह और भानु प्रताप सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ से अलग होने का किया ऐलान…

    किसान आंदोलन में फूट, नेता वीएम सिंह और भानु प्रताप सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ से अलग होने का किया ऐलान…

    दिल्ली। किसान आंदोलन को बड़ी खबर सामने आ रही है। किसान संघर्ष समिति ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा करते हुए खुद को इस आंदोलन से अलग कर लिया है। किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष एवं आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े वीएम. सिंह ने कहा कि हिन्दुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है। उस मर्यादा को जिन्होंने भंग किया और जिन्होंने भंग करने वो भी गलत हैं। वीएम सिंह ने कहा, हम अपना आंदोलन यहीं वापस ले रहे हैं और हमारा संगठन इस हिंसा में शामिल नहीं है।

    भारतीय किसान यूनियन का भानु गुट भी किसान आंदोलन से अलग हो गया है। संगठन के मुखिया भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जो आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने चिल्ला बॉर्डर से धरना खत्म करने का एलान किया है। किसान नेता वीएम सिंह ने आंदोलन राकेश टिकैत व अन्य किसान नेताओं पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने भड़काया उन पर सख्त कार्रवाई हो। वीएम सिंह ने कहा कि, सरकार की भी गलती है जब कोई 11 बजे की जगह 8 बजे निकल रहा है तो सरकार क्या कर रही थी। उन्होंने राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकैत अलग रास्ते से जाना चाहते थे। 

  • केंद्र सरकार की तैयारी, आठ साल पुरानी गाड़ियों पर लग सकता है ग्रीन टैक्स…

    केंद्र सरकार की तैयारी, आठ साल पुरानी गाड़ियों पर लग सकता है ग्रीन टैक्स…

    दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय आठ साल पुराने वाहनों पर टैक्स लगाने की तैयारी में है. लिहाजा, मंत्रालय ने पुराने वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। आठ साल से पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। फिटनेस प्रमाण पत्र दिए जाने के वक्त इस टैक्स का भुगतान करना होगा। फिलहाल, इस संबंध में औपचारिक रूप से अधिसूचना जारी करने से पहले इस प्रस्ताव को राज्यों को परामर्श के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक ट्रांसपोर्ट वाली गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स, रोड टैक्स के 10 से 25% की दर से लगेगा। 15 साल के बाद पंजीकरण प्रमाणन के नवीनीकरण के समय पर्सनल गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा। सार्वजनिक परिवहन वाहनों मसलन सिटी बसों पर कम ग्रीन टैक्स लगाया जाएगा।

    अत्यधिक प्रदूषित शहरों में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सबसे ज्यादा ग्रीन टैक्स (रोड टैक्स का 50%) लगेगा। डीजल और पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियों के लिए कैटगरी होगी, जिन पर अलग-अलग दर से ग्रीन टैक्स लगेगा। उन लोगों को राहत मिलेगी जो सीएनजी, एलपीजी, इथेनॉल, इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाते हैं, ऐसे वाहनों को ग्रीन टैक्स के बाहर रखा जाएगा। खेती-किसानी से जुड़े वाहनों जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, टिलर आदि को भी ग्रीन टैक्स से बाहर रखा गया है।

    प्रस्ताव के मुताबिक ग्रीन टैक्स से प्राप्त राजस्व को एक अलग खाते में रखा जाएगा, और इसका इस्तेमाल प्रदूषण से निपटने के लिए किया जाएगा, साथ ही राज्यों में उत्सर्जन निगरानी के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं भी स्थापित की जाती हैं।

    केंद्र सरकार ने ग्रीन टैक्स के फायदे गिनाए हैं, सरकार की दलील है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गाड़ियों से लोगों को दूर रखने के मकसद से यह टैक्स लगाने का प्रावधान किया जा रहा है, साथ ही लोगों को ऐसे वाहन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा, जो कम प्रदूषण पैदा करते हैं। ग्रीन टैक्स से प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिलेगी.मंत्रालय ने सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व वाले वाहनों की डीरिजस्ट्रेशन और उनकी स्क्रैपिंग की नीति को भी मंजूरी दी है, जो 15 साल से पुराने हैं. फिलहाल, इसे नोटिफाइड किया जाना है। यह 1 अप्रैल, 2022 से लागू होगा।