Author: Sunil Agrawal

  • सरकार नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में 1 साल फ्री रिचार्ज दे रही है? जानें सच

    सरकार नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में 1 साल फ्री रिचार्ज दे रही है? जानें सच

    हाल ही में टोक्यो में संपन्न हुए ओलंपिक खेलों में भारत ने शानदार प्रर्दशन किया है। इन खेलों में भारत ने एक गोल्ड मेडल समेत सात पदक जीते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई भ्रामक खबरें शेयर की जा रही है। इन दिनों व्हाट्सऐप पर एक ऐसा ही मैसेज वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि, नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में भारत सरकार हर बच्चे को एक साल का मोबाइल रिचार्ज फ्री में दे रही है।

    दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे मैसेज में कहा गया है कि, नीरज चोपड़ा ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में भारत सरकार सभी भारतीय बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए 2399 रुपए का 12 महीने वाला फ्री रिचार्ज फ्री में देने का वादा किया है। तो अभी नीचे नीले रंग की लिंक पर क्लिक करके अपने पर रिचार्ज करें। इसे मैजेस के साथ एक लिंक https://free-rec.site दिया है। अब इस पर सरकार की ओऱ संचार एजेंसी पीआईबी की ओऱ फैक्ट चैक किया गया है।

    पीआईबी ने आज ट्वीट कर लिखा कि, दावा: #Olympics2021 में स्वर्ण पदक मिलने की खुशी में भारत सरकार सभी को 12 महीने फ्री रिचार्ज का अवसर दे रही है। #PIBFactCheck यह दावा फर्जी है। भारत सरकार ने फ्री रिचार्ज के बारे में ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। कृपया ऐसे किसी भी फर्जी लिंक पर अपनी निजी जानकारी साझा न करे। इसके साथ ही पीआईबी ने ऐसे लिंक पर बचने के लिए आगाह किया है।


    फर्जी खबर यानी फेक न्यूज से निपटने के लिए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और योजनाओं के बारे में खबरों का सत्यापन करने के लिए एक ‘तथ्य जांच इकाई’ गठित की है जिसे पीआईबी फैक्ट चेक टीम कहा जाता है। पीआईबी फैक्ट चेक टीम द्वारा आप भी किसी भी संदेश की सत्यता की जांच करा सकते हैं। इसके तहत मीडिया में सरकार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबरों की सच्चाई का पता लगाया जाता है। अगर आपके पास भी कोई डाउटफुल खबर है तो आप उसे factcheck.pib.gov.in या फिर वॉट्सऐप नंबर +918799711259 या ईमेलः pibfactcheck@gmail.com पर भेज सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी पीआईबी की वेबसाइट pib.gov.in पर भी उपलब्ध है।

  • 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रध्वज फहराने में क्या अंतर है जानिए….

    15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रध्वज फहराने में क्या अंतर है जानिए….

    15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस वाले दिन राष्ट्रीय ध्वज को ऊपर खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है। इसे ध्वजारोहण कहा जाता है। वहीं 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस वाले दिन राष्ट्रीय ध्वज ऊपर बंधा रहता है। उसे खोलकर फहराया जाता है जिसे झंडा फहराना कहते हैं। अंग्रेजी में ध्वजारोहण के लिए Flag Hoisting और झंडा फहराने के लिए Flag Unfurling शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

    प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति

    15 अगस्त को आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री शामिल होते हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ही ध्वजारोहण करते हैं। 26 जनवरी को आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं।

    स्थान का फर्क

    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन लाल किले पर होता है। वहीं प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। प्रधानमंत्री इस मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं। वहीं गणतंत्र दिवस के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन राजपथ पर होता है। गणतंत्र दिवस वाले दिन राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं।

    26 जनवरी को ही राष्ट्रपति क्यों फहराते हैं ध्वज?

    प्रधानमंत्री देश के राजनीतिक प्रमुख होते हैं जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख। देश का संविधान 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ। उससे पहले न देश में संविधान था और न राष्ट्रपति। इसी वजह से हर साल 26 जनवरी को राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

  • जश्न-ए-आजादी, सीएम बघेल ने छत्तीसगढ़ को 4 नए जिले और 25 तहसील की दी सौगात

    जश्न-ए-आजादी, सीएम बघेल ने छत्तीसगढ़ को 4 नए जिले और 25 तहसील की दी सौगात

    छत्तीसगढ़ के 4 नए जिले
    मोहला मानपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, मनेन्द्रगढ़ को नया जिला बनाने का ऐलान किया गया है। राज्य में अब कुल 32 जिले हो गए है।

    25 नए तहसीलों की घोषणा की

    नांदघाट, सुहेला, भडग़ांव, सीपत, बोदरी, बिहारपुर,
    चांदो, रघुनाथनगर, कोचली, कोटमी- सकोला, सरिया,

    छाल, अजगरबहार, बरपाली, अहिवारा, सरोना, कोरर,
    बारसूर, मर्दापाल, धनोरा, अड़भाड़, कुटरू, गंगालूर,
    लालबहादुर नगर, तोंगपाल तहसीलों की घोषणा

  • पूर्व IAS अफसर अमिताभ ठाकुर का बड़ा ऐलान, सीएम योगी के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव….

    पूर्व IAS अफसर अमिताभ ठाकुर का बड़ा ऐलान, सीएम योगी के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव….

    लखनऊ। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शनिवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ खड़े होंगे। उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी ठाकुर को समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया था। ठाकुर ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे । उन्होंने कहा,” आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी, उत्पीड़नात्मक तथा विभेदकारी कार्य किये, वह इनके विरोध में मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे,फिर चाहे आदित्यनाथ जहां से भी चुनाव लड़ें।

    ठाकुर ने कहा कि यह उनके लिए सिद्धांतों की लड़ाई है, जिसमें वह गलत के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त करेंगे। उन्हें गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुपालन में गत 23 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया था कि ठाकुर को “उनकी सेवा के शेष कार्यकाल के लिए बनाए रखने के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया”। इसमें कहा गया, “जनहित में अमिताभ ठाकुर को उनकी सेवा पूरी होने से पहले तत्काल प्रभाव से समय से पहले सेवानिवृत्ति दी जा रही है।”

  • यात्रा के दौरान जीरो ट्रैफिक रूल लागू ना हो,सीएम ने लिया बड़ा फैसला…

    यात्रा के दौरान जीरो ट्रैफिक रूल लागू ना हो,सीएम ने लिया बड़ा फैसला…

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई ने बेंगलुरु में अपनी शहर की यात्रा के लिए जीरो ट्रैफिक रूल लागू नहीं करने का फैसला किया है. इससे पहले मुख्यमंत्री को अपने मंत्रियों के साथ शहर में यात्रा के दौरान यातायात की भीड़ से बचने के लिए जीरो ट्रैफिक मिल रहा था. इस रूल को तोड़ने के लिए कर्नाटक के सीएम बोम्मई ने अपनी यात्रा पर जीरो ट्रैफिक नहीं लगाने का फैसला किया. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार सीएम बोम्मई ने बेंगलुरु में अपनी शहर की यात्रा के लिए जीरो ट्रैफिक नहीं देने का आदेश दिया है. इसी तरह के नोट पर बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने एक आदेश जारी किया है जिसमें उल्लेख किया गया है कि जब मंत्री यात्रा करेंगे तो सिग्नल फ्री (हरी बत्ती) होगा और यात्रा के दौरान एंबुलेंस को भी चलने की अनुमति होगी.

    गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने भी की थी जीरो ट्रैफिक रूल की वकालत इससे पहले कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने भी कहा था कि वो अपने लिए ये जीरो ट्रैफिक रूल नहीं चाहते हैं. इससे पहले गुरुवार को सरकारी कार्यक्रमों में गुलदस्ते, माला और स्मृति चिन्ह देने के चलन को खत्म करने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई ने कहा कि वो जल्द ही एक आदेश जारी कर उन्हें और अन्य मंत्रियों को उनकी यात्राओं के दौरान जिलों और सार्वजनिक स्थानों पर सलामी गारद दिए जाने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाएंगे. बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा था कि मैंने कहा है कि हवाई अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सलामी गारद दिए जाने की कोई जरूरत नहीं है. हर बार जब मैं जाता हूं तो जिला स्तर पर इसकी आवश्यकता नहीं है.

  • नौ साल में निवेशकों के 129 करोड़ ही लौटाए जा सके, सामने नहीं आ रहे दावेदार, सेबी के खाते में है 23 हजार करोड़ रुपये…

    नौ साल में निवेशकों के 129 करोड़ ही लौटाए जा सके, सामने नहीं आ रहे दावेदार, सेबी के खाते में है 23 हजार करोड़ रुपये…

    सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों को नौ साल में मात्र 129 करोड़ रुपये ही लौटाए जा सके हैं। पिछले साल पूंजी बाजार नियामक ‘सेबी’ मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर खोले गए विशेष खाते में सेबी के पास निवेशकों के लौटाने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये का भंडार है। 

    बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिभूमि व विनिमय बोर्ड (सेबी) को सहारा समूह की इन कंपनियों के निवेशकों को पैसा लौटाने का जिम्मा सौंपा हैै। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा समूह ने निवेशकों को लौटाने के लिए विशेष एस्क्रो अकाउंट में 23,000 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। सेबी द्वारा गुरुवार को  दी ताजा जानकारी में यह बात कही गई है। 


    सहारा समूह की दो कंपनियों के बांडधारकों में से अधिकांश दावे के लिए सामने नहीं आए हैं। कोर्ट ने इन कंपनियों को अगस्त 2012 में करीब तीन करोड़ निवेशकों को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश दिया था।

    पिछले साल लौटाए जा सके मात्र 14 करोड़ रुपये
    पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में सेबी मात्र 14 करोड़ रुपये ही लौटा सका है, जबकि सेबी-सहारा के रिफंड खातों में इस दौरान 1400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में सेबी ने कहा कि उसे 31 मार्च, 2021 तक 19,616 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें लगभग 81.6 करोड़ रुपये के रिफंड के दावे शामिल थे। इनमें से 16,909 मामलों में 129 करोड़ रुपये, जिसमें 66.35 करोड़ रुपये मूलधन और 62.34 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है, का रिफंड जारी किया है। 2.3 करोड़ रुपये से अधिक के 483 आवेदनों में त्रुटियों को दूर करने के लिए निवेशकों को वापस भेजा गया है।

    इससे पहले सेबी ने 31 मार्च, 2020 को बताया था कि उसके द्वारा रिफंड की गई कुल राशि को 115.2 करोड़ रुपये है। सेबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों और नियामक द्वारा पारित कुर्की आदेशों के अनुसार, 31 मार्च, 2021 तक कुल 15,473 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। 

    सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के फैसले के अनुसार बांडधारकों को रिफंड करने के बाद उन पर अर्जित ब्याज के साथ इन राशियों को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा किया गया है। 31 मार्च, 2021 तक, जमा की गई कुल राशि इन बैंकों में 23,191 करोड़ रुपये हैं।जबकि 31 मार्च, 2020 को यह राशि 21,770.70 करोड़ रुपये थी।

    सहारा समूह ने यह कहा
    सेबी के नवीनतम बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, सहारा समूह ने कहा कि उसके अपने अनुमान के अनुसार सहारा-सेबी खाते में ब्याज सहित जमा राशि लगभग 25,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। समूह ने आरोप लगाया कि सेबी के पास सहारा और उसके निवेशक का पैसा अनुचित ढंग से रोक कर बैठा है। रिफंड के दावों को आमंत्रित करने के लिए सेबी द्वारा वर्षों से दिए गए अखबारों के विज्ञापनों के विभिन्न दौरों का उल्लेख करते हुए, सहारा ने कहा कि नियामक ने पिछले विज्ञापन में स्पष्ट कर दिया था कि वह जुलाई 2018 के बाद प्राप्त किसी भी दावे पर विचार नहीं करेगा। इसका मतलब है कि सेबी के लिए और अधिक दावेदारों का भुगतान नहीं किया जाना है और सहारा के द्वारा जमा किए गए पूरे 25,000 करोड़ रुपये अनुचित रूप से सेबी के पास हैं। उन्हें सहारा को वापस कर दिया जाना चाहिए। सहारा ने अपने तीन करोड़ निवेशकों से संबंधित सभी मूल दस्तावेज सेबी को नौ साल पहले दे दिए थे। वर्षों पहले सत्यापन के लिए और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, 25,000 करोड़ रुपये की यह राशि अंततः सहारा को वापस आ जाएगी। 

  • ICMR ने कहा, Covishield और Covaxin को मिलाने पर स्टडी में दिखे अच्छे रिजल्ट…

    ICMR ने कहा, Covishield और Covaxin को मिलाने पर स्टडी में दिखे अच्छे रिजल्ट…

    दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भारत को एक और अच्छी खबर मिलती दिख रही है. कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीकों की मिश्रित खुराकों पर अध्ययन के परिणाम सुकून देने वाले हैं. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कहा है कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड की मिक्सिंग और मैचिंग स्टडी में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं. अध्ययन में इन दोनों वैक्सीन के मिलाने से यह न सिर्फ वायरस के खिलाफ सुरक्षित पाया गया, बल्कि इससे  बेहतर इम्युनोजेनेसिटी भी प्राप्त हुई।

    माना जा रहा है कि अगर स्टडी की फाइनल रिपोर्ट में परिणाम बेहतर मिलते हैं और सरकार अगर कोवैक्सीन और कोविशील्ड मिश्रित खुराकों को मंजूरी देती है, तो कोरोना वायरसे खिलाफ टीकाकरण अभियान में इसका सकारात्मक असर दिखेगा. दरअसल, बीते दिनों भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने इस बात की सिफारिश की थी कि वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) को कोविड-19 के दो टीकों कोवैक्सीन और कोविशील्ड के मिश्रण के क्लिनिकल परीक्षण की इजाजत दी जाए, जिसके बाद इसकी मंजूरी मिली थी।

    समिति ने भारत बायोटेक को उसके कोवैक्सिन और प्रशिक्षण स्तर के संभावित एडेनोवायरल इंट्रानैसल टीके बीबीवी154 के परस्पर परिवर्तन पर अध्ययन करने के लिए मंजूरी देने की भी सिफारिश की थी, लेकिन हैदराबाद स्थित कंपनी को अपने अध्ययन से ‘परस्पर परिवर्तन’ शब्द हटाने को कहा है और मंजूरी के लिए संशोधित प्रोटोकॉल जमा कराने को कहा था।

    300 स्वयंसेवकों पर परीक्षण
    एक सूत्र ने बताया था कि विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने विस्तृत विचार विमर्श के बाद वेल्लोर के सीएमसी को चौथे चरण का क्लिनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की, जिसमें कोविड-19 टीकों, कोवैक्सिन और कोविशील्ड के मिश्रण पर अध्ययन करने के लिए 300 स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया गया।

  • कांग्रेस पार्षद और CMO में जमकर विवाद… गाली-गलौच के बाद मामला पहुंचा थाने…

    कांग्रेस पार्षद और CMO में जमकर विवाद… गाली-गलौच के बाद मामला पहुंचा थाने…

    बिलासपुर। रतनपुर नगर पालिका में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और कार्यपालिका के बीच टकराव की स्थिति नजर आने लगी है. नगर पालिका सीएमओ और पार्षद रमेश सूर्या व उनके साथ गए वार्ड की महिलाओं के बीच आज जमकर बहस हुई, दोनों पक्षों ने गाली-गलौच, अपशब्दों का प्रयोग जैसी अपनी शिकायत थाने में दर्ज कराई है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    सीएमओ मधुलिका सिंह नगरपालिका कर्मचारियों के साथ पैदल ही थाने पहुंच गई और पार्षद एवं कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या और उनके साथियों जितेंद्र दुबे, कमल सोनी, विनय कश्यप सहित 50 लोगों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई. मधुलिका सिंह ने शिकायत की है, कि ये सभी लोग जबरदस्ती उनके चेंबर में घुस गए थे और गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाया. इस दौरान उनके दफ्तर में ताला लगाने की भी धमकी दी गई और कर्मचारियों से धक्का-मुक्की भी की गई. बिना अनुमति के वीडियो बनाने का आरोप भी सीएमओ ने लगाया है. उन्होंने सभी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने और कोविड गाइडलाइन का उल्लंघन करने की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

    इधर वार्ड 14 के पार्षद व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रमेश सूर्या भी अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए और उन्होंने सीएमओ पर ही आरोपों की झड़ी लगा दी. उन्होंने दावा किया कि वे वार्ड में नाली, बिजली पानी जैसी जन शिकायतों को लेकर सीएमओ से मिलने पहुंचे थे, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जातिगत गालियां दी गई, और उसके बाद सीएमओ थाने में शिकायत करने पहुंच गई।

  • हाईकोर्ट का फ़ैसला, विद्युत दुर्घटना में बिजली विभाग ही होगा जिम्मेदार…

    हाईकोर्ट का फ़ैसला, विद्युत दुर्घटना में बिजली विभाग ही होगा जिम्मेदार…

    विद्युत दुर्घटना में बेटे की मौत को लेकर दायर पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि विद्युत दुर्घटना से मौत का जिम्मेदार विभाग ही होगा. हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को मृतक के पिता को 45 दिनों के भीतर 4 लाख 50 हजार रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है.

    बतादें कि, याचिकाकार्ता ओमप्रकाश का पुत्र विद्युत विभाग के अधीन अक्षय ऊर्जा एजेंसी महासमुंद में क्रेडा द्वारा स्थापित सौर संयत्र में कार्यरत था. 16 दिसंबर 2019 को कार्य संचालान के दौरान विद्युत दुर्घटना की वजह से उसकी मृत्यु हो गई. मृत्यु जांच में भी पाया गया कि, याचिकाकर्ता के पुत्र की मृत्यु विद्युत प्रवाह से हुई है. इसके बाद भी याचिकाकर्ता को कोई मुआवजा नहीं दिया गया.

    इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की. याचिका मे बताया गया की यदि कोई भी संस्था, विभाग या कंपनी खतरनाक प्रकृति का कार्य संचालित करती है. तो उस कार्य संचालन के दौरान यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो ऐसी संस्था कठोर दायित्व सिद्धांत के तहत सदैव उत्तरदायी होगी‌. ऐसे प्रकरणों में लापरवाही सिद्ध करना आवश्यक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी मध्यप्रदेश विद्युत मंडल VS शैल कुमारी के केस में भी यही सिद्धांत प्रतिपादित किया है.

    हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर विभाग को 45 दिनों के भीतर 4 लाख 50 हजार मुआवजा वो भी ब्याज समेत प्रदान करने का आदेश दिया है।

  • एटीएम में पर्याप्त नगदी नहीं रखना अब बैंकों को पड़ेगा भारी…

    एटीएम में पर्याप्त नगदी नहीं रखना अब बैंकों को पड़ेगा भारी…

    केंद्रीय बैंक RBI ने एटीएम मशीन से कैश न निकलने पर बैंकों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है. एटीएम में कैश की उपलब्धता न होने पर आम लोगों की दिक्कतों को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह फैसला किया है।

    एटीएम की सुविधा होने से नगदी को लेकर काफी सहूलियत हो गई है. हालांकि जब एटीएम मशीन से कैश नहीं मिलता है तो बहुत दिक्कत होती है. अब यह समस्या जल्द हल होने वाली है क्योंकि केंद्रीय बैंक RBI ने एटीएम मशीन से कैश न निकलने पर बैंकों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है. एटीएम में कैश की उपलब्धता न होने पर आम लोगों की दिक्कतों को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह फैसला किया है. आरबीआई का यह फैसला 1 अक्टूबर से लागू होगा. आरबीआई के निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर 2021 से अगर किसी बैंक के एटीएम में किसी महीने 10 घंटे भी कैश उपलब्ध नहीं रहता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है. आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि यह फैसला (Scheme of Penalty for non-replenishment of ATMs ) इसलिए लिया गया है ताकि एटीएम के जरिए लोगों को पर्याप्त नगदी सुनिश्चित की जा सके.

    ATM में कैश अवेलिबिटी जानने के लिए बनेगा सिस्टम

    आरबीआई के पास बैंकनोट्स जारी करने का मैंडेट है जबकि बैंक अपने ब्रांचेज और एटीएम के नेटवर्क के जरिए पब्लिक को जरूरत के मुताबिक नोट देकर इस मैंडेट को पूरा करती है. इस संबंध में एक रिव्यू में पाया गया कि एटीएम मशीन में कैश की अनुपलब्धता के चलते आम लोगों को असुविधा होती है. ऐसे में यह फैसला लिया गया है कि बैंक/व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर्स (WLAOs) अपने सिस्टम्स/मैकेनिज्म को मजबूत करेंगे ताकि एटीएम में नगदी की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सके. इस मैकेनिज्म के तहत अगर पता चलता है कि एटीएम में नगदी खत्म हो गई है तो उसे भरा जा सके. RBI के निर्देशों के मुताबिक इसके उल्लंघन पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

    प्रति एटीएम 10 हजार रुपये का लगेगा जुर्माना

    आरबीआई के फैसले के मुताबिक अगर किसी महीने में 10 घंटे से अधिक कैश उपलब्ध नहीं रहता है तो प्रति एटीएम 10 हजार रुपये का फ्लैट जुर्माना लगाया जाएगा. व्हाइट लेबल एटीएम (WLA)के मामले में जुर्माना बैंक लगाएंगे. एटीएम में कैश न होने पर बैंकों पर जो जुर्माना लगेगा, उसकी रिकवरी डब्ल्यूएलए ऑपरेटर से होगी जिस पर एटीएम में कैश उपलब्धता की जिम्मेदारी होगी. जून 2021 के अंत तक देश भर में 2,13,766 एटीएम थे.